सम्राट मिहिर भोज किस जाति से थे, जानिये सच !

हिन्दूहृदय सम्राट मिहिरभोज जी की जाति पर, राजपूत समाज बिना किसी प्रमाण के अभी तक खोखले दावे करते आया है। इनके हिसाब से क्षत्रिय एक वर्ण ना होकर एक जाति है। 

और इसी प्रकार क्षत्रिय वंश के सभी राजा महाराजाओ पर ये अपना हक जताते हैं। लेकिन ये क्षत्रिय को एक जाति से जोड़कर हिन्दू धर्म और वैदिक काल की व्यवस्था को चुनौती देने का कार्य कर रहे हैं। 

बिना किसी प्रमाण के ये अलग - अलग वंशों को राजपूत जाति से जोड़ते ही जा रहे हैं। जबकि 'राजपूत' शब्द १२ वी सदी से पहले कही देखने को नहीं मिलता है। 

ना ही इनके कोई शिलालेख मिलते हैं।  ये बस मनगढंत कहानी बनाकर समाज में परोसने का कार्य करते रहते हैं। बिना किसी तथ्य - प्रमाण के ये क्षत्रिय को जाति बनाकर किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। 

अगर इनसे कोई प्रमाण मांग ले तो सतयुग तक के दावे ठोकते हैं। 😂
आइये आपको प्रमाणों के साथ बताते हैं कि सम्राट मिहिर भोज की जाति क्या थी ?


मिहिर भोज किस जाति से थे


सम्राट मिहिर भोज किस जाति से थे |  Mihir Bhoj ki Caste Kya hai 


सम्राट मिहिर भोज गुर्जर जाति से थे। जिसके प्रमाण कईं शिलालेखों में दिए गए हैं। इनके राजवंश का नाम भी गुर्जर प्रतिहार राजवंश था। आगे आपको सारे प्रमाण व तथ्य देखने को मिलेंगे, जिनसे प्रमाणित हो जाएगा कि सम्राट मिहिरभोज की जाति गुर्जर थी। 

सम्राट मिहिर भोज के गुर्जर जाति से होने के प्रमाण :


नीलकुण्ड, राधनपुर, देवली तथा करडाह शिलालेख में प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है । राजजर शिलालेख" में वर्णित "गुर्जारा प्रतिहारवन" वाक्यांश से यह ज्ञात होता है कि 'प्रतिहार' गुर्जर वंश से संबंधित थे।


  • चालुक्य नरेश पुलकेशियन द्वितीय का एहोल अभिलेख -


बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशियन द्वितीय के एहोल अभिलेख में गुर्जर जाति का उल्लेख आभिलेखिक रूप से हुआ है। राजोरगढ़ (अलवर जिला) के मथनदेव के अभिलेख (959 ईस्वी ) में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिहार वंशी गुर्जर जाति के लोग थे। 

इस अभिलेख से यह प्रमाणित होता है कि प्रतिहार वंश के लोग गुर्जर जाति से थे।  और सम्राट मिहिर की जाति भी गुर्जर ही थी। 

  • दद्दा प्रथम का अभिलेख :


नागभट्ट के चाचा दद्दा प्रथम को शिलालेख में "गुर्जरा-नृपाती-वाम्सा" कहा गया है।  यह स्पष्ट करता है कि सम्राट नागभट्ट प्रतिहार एक गुर्जर था।  क्योंकि वाम्सा स्पष्ट रूप से परिवार का तात्पर्य है। नागभट्ट के पोते मिहिर भोज की जाति भी तो वो ही होगी ना जो उनके दादा की रही होगी। Common Sense !!

  • सज्जन ताम्रपत्र 


इस ताम्रपत्र अभिलेख मे लिखा है कि राष्ट्र कूट शासक दन्तिदुर्ग ने 754 ई. मे "हिरण्य - गर्भ - महादान " नामक यज्ञ किया। अवांछित और खंडित दासवतारा गुफा शिलालेख का उल्लेख है कि दांतिदुर्ग ने उज्जैन में उपहार दिए थे और राजा का शिविर गुर्जर महल उज्जैन में स्थित था। 

(मजूमदार और दासगुप्त, भारत का एक व्यापक इतिहास)। अमोगवरास (शक संवत 793 = एडी 871) के संजन तांबे की प्लेट शिलालेख दांतिदुर्ग को उज्जैनिस दरवाजे के रखवाले (एल, वॉल्यूम XVIII, पृष्ठ 243,11.6-7)तो इस शुभ अवसर पर गुर्जर आदि राजाओ ने यज्ञ की सफलता पूर्वक सचालन हेतु यज्ञ रक्षक ( प्रतिहार ) का कार्य किया । ( अर्थात यज्ञ रक्षक प्रतिहारी का कार्य किया )और प्रतिहार नाम दिया ( " हिरणय गर्भ राज्यनै रुज्जयन्यां यदसितमा प्रतिहारी कृतं येन गुर्जरेशादि राजकम " )

 इससे भी यही प्रमाणित होता है कि प्रतिहार गुर्जर जाति से हैं।  


  • बडोदा ताम्रपत्र -

कर्क राज का बडोदा ताम्रपत्र शक स. 734 ( 811-812 ई ) इस अभिलेख मे गुर्जरैश्वर नागभट्ट - II का उल्लेख है ।   ( गोडेन्द्र वगपति निर्जय दुविदग्ध सद गुर्जरैश्वर -दि गर्गलताम च यस। 


  • बगुम्रा-ताम्रपत्र -


( 915 ई. ) इन्द्र - तृतीय का बगुम्रा -ताम्र पत्र शक सं.837 ( 915 ई ) का अभिलेख मे गुर्जर प्रतिहार राजवंश के राजा सम्राट महेन्द्र पाल या महिपाल को दहाड़ता गुर्जर ( गर्जदै गुर्जर - गरजने वाला गुर्जर ) कहा गया है । ( धारासारिणिसेन्द्र चापवलयै यस्येत्थमब्दागमे । गर्जदै - गुर्जर -सगर-व्यतिकरे जीणो जनारांसति।) 

{ सन्दर्भ :- 1. बम्बई गजेटियर, भाग -1 पृष्ट - 128, नोट -4 2. उज्जयिनी इतिहास तथा पुरातत्व, दीक्षित - पृष्ठ - 184 -185 }

ये ताम्रपत्र उन बातों को खंडित करता है, जो राजपूत कहते हैं कि गुर्जर उपाधि है और स्थान का नाम है। 

बगरुमा ताम्र पत्र के अभिलेख के अभिलेख में महेंद्र पाल को दहाड़ता गुर्जर कहा गया है।  अब जगह तो दहाड़ नहीं सकती है क्यूंकि वो निर्जीव है।  इससे यह प्रमाणित होता है कि प्रतिहार गुर्जर थे। 


 राजोरगढ अभिलेख :


( 960 ई. ) - गुर्जर राजा मथन दैव का वि.स.( 960 ई ) का राजोर गढ ( राज्यपुर ) अभिलेख मे महाराज सावट के पुत्र गुर्जर प्रतिहार मथनदैव को गुर्जर वंश शिरोमणी तथा समस्त जोतने योग्य भूमि गुर्जर किसानो के अधीन उल्लेखित है । ( श्री राज्यपुराव सिथ्तो महाराजाधिराज परमैश्वर श्री मथनदैवो महाराजाधिरात श्री सावट सूनुग्गुज्जॆर प्रतिहारान्वय स्तथैवैतत्प्रतयासन्न श्री गुज्जॆर वाहित समस्त क्षैत्र समेतश्च ) ***


Final Words :


इस पोस्ट का उद्देश्य आपको सम्राट मिहिरभोज की जाति बताना है। इसमें हमने अलग अलग अभिलेखों के बारे में बताया है। 
कई पुस्तकें भी लिखी हुई हैं , जिनमे साफ़ लिखा है कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे।  राजपूतों के पास एक भी अभिलेख ऐसा नहीं है, जिसमे वो मिहिर भोज को राजपूत साबित क्र सकें। 

उनके पास है तो बस १६ वी शताब्दी की खुद की लिखी हुई मनगढ़ंत कहानियां।  जिनके कोई प्रमाण तथ्य नहीं है। 

राजपूतों का एक शिलालेख भी देखने को नहीं मिलता है।  १२ वी सदी से पहले ये खुद का वजूद भी साबित नहीं कर सकते। 

मैं किताबों में लिखे हुए कि बात नहीं कर रहा क्यूंकि किताबे तो बदलती रहती हैं। 

मै चैलेंज करता हूँ , अगर कोई राजपूतो का शिलालेख दिखा दे गुर्जर प्रतिहार काल में।  😂 हवाबाजी से कुछ नहीं होता। 

तो इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको विशवास हो ही गया होगा कि सम्राट मिहिरभोज क्षत्रिय गुर्जर जाति से थे। 

धन्यवाद ! आगे भी और ऐसे ही post पढ़ने के लिए आप Gurjaratra  से जुड़े रहें। 


Q/A

Q: Mihir Bhoj kis jati ke the ?

A: मिहिर भोज गुर्जर जाति के थे और सनातन धर्म रक्षक थे। वे गुर्जर प्रतिहार वंश के शाषक थे।"

Q: Mihir Bhoj kaun the ?

A: "सम्राट मिहिरभोज गुर्जर भारत के एक महान सम्राट थे। जिन्होंने अरबियों को भारत मे घुसने ना दिए। इनके चर्चे भारत से लेकर अरब तक फैले हुए हैं।"